Saturday, January 8, 2011

अब न लागे ख़ुदा से भी डर............

सब्र भी अब करूँ किस तरह
तू बता दे जियूं किस तरह


बिन तेरे जीना मुश्किल है अब
ये बता दे मरूं किस तरह


अब न लागे ख़ुदा से भी डर
तू बता दे डरूँ किस तरह


प्यार करना बड़ा जुर्म है
जुर्म से इस बचूं किस तरह


ईश्क़ में दिल हुआ ला पता
हाल-ए-दिल मैं कहूँ किस तरह


दर्द तूने दिया ला दवा
दर्द-ए--दिल अब सहूँ किस तरह


तुमने होटों को वा कर दिये
जाम-ए-लब मैं पियूँ किस तरह


"लुत्फ़ी"जब ना बचा ईश्क़ से
ईश्क़ से मैं बचूं किस तरह..............................

1 comments:

राकेश कौशिक said...

लाजवाब

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