Thursday, December 30, 2010

ऐ दोस्त मेरे तू जाँ है मेरी,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

ऐ दोस्त मेरे तू जाँ है मेरी, तू है जहाँ मैं हूँ वहीं
ग़म जो भी हो छू हो जाता है, लेता हूँ तेरा जो नाम कहीं

हर रोज़ हज़ारों मिलते हैं,पर तुझ से अच्छा कोई नहीं
लाखों में तू ही सच्चा है और तुझ से सच्चा कोई नहीं
जो तू ज़िंदा तो मैं ज़िंदा, जो तू नहीं तो मै नहीं
ऐ दोस्त मेरे तू जाँ है.........................................

अंदाज़ तेरा तेरे जैसा, तू ख़ुद जैसा ही लगता है
हर बात नई सी तेरी तू हर वक़्त नया सा लगता है 
अंदाज़-ए-बयां क्या ज़िक्र करूँ,ये मेरे बस की बात नहीं
ऐ दोस्त मेरे तू जाँ है...........................................

जब साथ तेरा हो तो मुझको हर सिम्त बहारें दिखती हैं
अँधेरा उजाला लगता है और रातें दिन हो जाती हैं
गर साथ तेरा हो तो मुझको प्यारा किसी का साथ नहीं
ऐ दोस्त मेरे तू जाँ है..................................................

तुझसा ही मीत मिले सबको ऐसी सबकी तक़दीर कहाँ
जो सामने तेरे टिक पाये, दुनिया में ऐसा वीर कहाँ
औरों से तुलना क्या करना, तू कहीं है, और कहीं
ऐ दोस्त मेरे तू जाँ है......................................

या रब! उसके ग़म मेरे हों और मेरी खुशियाँ उसकी हों
काँटों का सेज़ मिले मुझको,कलियों की बिस्तर उसकी हो
ऐ "रामिश","लुत्फी" कहता है, तू देव है, इन्सान नहीं
ऐ दोस्त मेरे तू जाँ है..............................................  

1 comments:

raag said...

itni tarif achhi nhin saheb.......shukriya

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