Wednesday, December 7, 2011

तू तो अविनाश है,कण-कण में तू रहेगा यहाँ...

कौन कहता है कि होगा तेरा विनाश यहाँ,
तू तो अविनाश है,कण-कण  में तू रहेगा यहाँ.

तेरी आहट से चला करती है खुशियों की लहर,
फूल खिल पड़ते हैं,रक्खे है तू क़दम को जहाँ.

सादगी तेरी बिखेरे है हवा में खुशबू,
तेरे मुस्कान से मिटता गया अँधेरा यहाँ.

आसमाँ से भी बड़े हैं तेरे ख़याल-ओ-फ़िकर ,
फ़िक्र-ओ-फ़न का बना रहेगा तू मिसाल यहाँ.

ज़िन्दगी का हर एक लम्हा मुबारक हो तुम्हें,
तेरी खुशहाली है "लुत्फ़ी" के हर दुआ में निहाँ.
                
                                   "लुत्फ़ी कैमूरी"

7 comments:

रविकर said...

शुक्रवारीय चर्चा-मंच पर है यह उत्तम प्रस्तुति ||

सुरेन्द्र "मुल्हिद" said...

yaar lutfi bhaai....kamaal kar diyaa...shabd nahee mil rahe hain tareef karne ko....aafareen!!

amrendra "amar" said...

behtreen prastuti,

प्रेम सरोवर said...

आपका पोस्ट अच्छा लगा । मेरे नए पोस्ट "खुशवंत सिंह" पर आपकी प्रतिक्रियायों की आतुरता से प्रतीक्षा रहेगी । धन्यवाद ।

कविता रावत said...

bahut khoobsurat nazm...

पंछी said...

bahut sundar :)

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